लगानी समाज के नई दिल्ली। कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के कारण देश में लॉकडाउन है। इस बीच देश के कई राज्यों के जेल में बंद कुछ कैदियों को भी तत्काल बेल देकर छोड़ा जा रहा हैमध्य प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने भी लगभग 5000 कैदियों को परोल पर तत्काल रिहा करने का फैसला किया है। इससे पहले कई राज्यों में पहले ही कैदियों को या तो जेल से बाहर निकाला जा चुका है या फिर निकालने के बारे में सोच रही है।मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश के 5000 कैदियों को 60 दिनों के लिए इमरजेंसी परोल देने जा रही है। इसके अलावा तीन हजार विचाराधीन कैदियों को अंतरिम बेल पर 45 दिनों के लिए छोड़ा जाएगा। इन सभी को अगले दो दिनों में राज्य के - विभिन्न जिलों से रिहा किया जाएगा। इसके अलावा केरल हाई कोर्ट ने भी विचाराधीन कैदियों को 30 अप्रैल तक के लिए अंतरिम जमानत दे दी है। बेल मिलने के बाद आरोपियों को स्थनीय पुलिस को रिपोर्ट करना होगा। साथ ही इन्हें लॉकडाउन का पालन भी करना होगा। बेल की अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें संबंधित ट्रायल कोर्ट में पेश होना होगा कोरोना वायरस के बढते प्रकोप को देखते हुए तिहाड़ जेल ने 356 कैदियों को 45 दिनों कि लिए अंतरिम बेल और 63 कैदियों को 8 हफ्ते के पैरोल पर रिहा कर दिया है। बता दें कि कोरोना वायरस का खतना जितना बाहर है उतना जेल में भी है। क्योंकि देश के अधिकतर जेलों में कैदियों की संख्या जेल की क्षमता से कही ज्यादा है। इसी को ध्यान में रखते हुए कुछ कैदियों को अंतरिम जमानत और कुछ को पैरोल पर रिहा किया जा रहा है केंद्र सरकार ने कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को जेलों में उपयक्त स्वच्छता बनाये रखने के लिए उचित कदम उठाने और विदेशी नागरिकों समेत सभी कैदियों के संबंध में जरूरी एहतियात बरतने को कहा है। सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशकों को भेजे पत्र में गृहमंत्रालय ने कहा है कि देश में वर्तमान स्थिति की उच्चतम स्तर पर निगरानी की जा रही है और ऐसे में यह जरूरी है कि बिना किसी अपवाद के सभी स्तरों पर जरूरी कदम उठाये जाएं। मंत्रालय में संयुक्त सचिव पुण्य सलिल श्रीवास्तव ने पत्र में लिखा है, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में जेल प्रशासन जेलों में उपयुक्त स्वच्छता स्थिति बनाये रखने के लिए उपयुक्त एहतियात और कदम उठाएं, साथ में यह भी जरूरी है कि फिलहाल एक दूसरे से दूरी बनाये रखने के लिए अदालतों में कैदियों की पेशी समेत उनकी आवाजाही कम करने के लिए कदम उठाये जाएं।